| أشاركك الحزن على ابنك المصلوب. |
| ألا ليتني أستطيع أن أكون معك، |
| وأقف بجوار الصليب في صحبتك، |
| راضياً، مغتبطاً، مرتبطاً في الحزن بك |
| فليحيني الصليب، |
| ولتنجني آلام المسيح المنقذة للبشر : |
| وليرعني بلطفه، |
| وإذا ما بلي جسمي |
| فلتنظر روحي في أمجاد السماء |
| إليه وجهاً لوجه. |
| صفحة رقم : 5629 |
|