| وأجرَيتُ فيها غديراً |
| لكي تضع فيه يدك |
| إذا ما هبت ريح الشمال باردة. |
| وهي المكان الجميل الذي نتنزه فيه |
| حين تكون يدي في يدك. |
| يفكر عقلانا ويبتهج قلبانا |
| لأننا نسير معاً؛ |
| إن سماع صوتك ليسكرني، |
| وحياتي كلها في سماعك، |
| وإن رؤيتك |
| لأحب إليّ من الطعام والشراب. |
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